
झुग्गी झोपड़ियों के वंचित बच्चो के जीवन में रोशनी लाने, महिला शसक्तीकरण, रेड लाइट एरिया, स्लम बस्ती, असहाय और असमर्थ के लिए उच्च शिक्षा के लिए संघर्षरत प्रसिद्ध चिंतक, लेखक, आईएएस मेंटर ,सामाजिक कार्यकर्ता डॉ .विक्रम चौरसिया को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बहुत से अवार्डो के साथ ही कई डॉक्टरेट डिग्री के उपाधि से भी सम्मानित किया जाना भारत जैसे युवा देश के युवाओं के साथ ही सभी वर्गों के लिए प्रेरणा है। ध्यातव्य हो डॉ. विक्रम चौरसिया मूलतः बिहार के कैमूर जिले के छोटे से गांव बघैला के निवासी हैं , जो अपने नौकरी को भी वंचित बच्चो के उत्थान के लिए छोड़ चुके है , ध्यातव्य हो स्कूल से ही अपने 24 घंटे में से कुछ समय निकालकर वंचित बच्चों को प्रेरित करने में लगे रहे फिर जब उच्च शिक्षा के लिए कानपुर और पटना गए तो वहां भी अलग अलग संस्थाओं के साथ मिलकर जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित करने के साथ ही मलिन बस्तियों में जाकर जागरूकता कैंप लगाकर लोगो को जागृत भी करते रहे, अभी वर्तमान में अपने सहयोग साथियों के साथ दिल्ली के झुग्गी झोपड़ियों के बच्चो में शिक्षा का अलख जगाने के साथ ही सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंद लोगों को मदद पहुंचा रहे , जो कि अभी हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति व मिसाइल मैन डॉ. एबीजे अब्दुल कलाम के सहयोगी रहे डीआरडीओ वैज्ञानिक राजेन्द्र प्रसाद भी इनके द्वारा संचालित हमारी आपकी पाठशाला में बच्चों से रूबरू हुए थे । डॉ.विक्रम न केवल जमीन से जुड़े जुझारू सामाजिक कार्यकर्ता बल्कि एक उच्च कोटि के सामाजिक और राजनैतिक विषयो के लेखक भी है, आपके दो चार लेख प्रतिदिन न केवल भारतीय प्रिंट मीडिया में जगह पाते है बल्कि सात समुंदर पार अमेरिका कनाडा और आस्ट्रेलिया जैसे देशों के समाचार पत्रों में प्रमुखता से जगह पाते है। आप IAS और PCS के परीक्षार्थियों के लिये मेंटर, उत्प्रेरक और जीवन से निराश लोगो के लिए एक आशा की किरण के रूप में कार्य करते है।आप टीवी चैनलों के कार्यक्रमो में प्रमुखता से सम्मिलित होते रहे है।यह आपके संघर्षो की एक बहुत ही छोटी सी पहचान है,आप का संघर्ष यू ही जारी रहेगा और आप प्रितदिन नई बुलंदियों को छुएंगे।

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