
रस अधरों का पी लेने दो
पुनः मुझे तुम जी लेने दो
तुमसे ही अस्तित्व प्रीत की
तुम ही मुझमें प्राण फूंकती
प्रथम प्रीत का तुम आमंत्रण
बन कर नस नस मेरे दौड़ती
प्रणय प्रेरणा प्रिय तुम से ही
हिय से हिय को सी लेने दो
रस अधरों का पी लेने दो
पुनः मुझे तुम जी लेने दो
सुलग तुम्हारी है जो मुझमें
शमन न हो कदापि जीवन में
तप कर तुममें कुंदन बन कर
अंग लिपट कर सजूँ मैं तुममें
मन की आग बुझा ही लेंगे
तन के हवन को घी देनेे दो
रस अधरों का पी लेने दो
पुनः मुझे तुम जी लेने दो
दिवस बीतता तुम्हें सोचकर
रात्रि तेरे स्वप्नों को देखकर
बुझबुझ प्यास उठे फिर ऐसी
पुनः मैं पाऊँ तुम्हें प्राप्तकर
तिल तिल रोज जलाती हो तुम
मिल मिल शीतल हो लेने दो
रस अधरों का पी लेने दो
पुनः मुझे तुम जी लेने दो
तुम ही मेरा जीवन यापन
तुम ही मेरी पूजन तर्पण
तुम से जीवन हवन हुआ अब
तुम ही हो मेरा आवाह्न
आंशिक होम मैं प्रतिदिन होता
पूर्णाहुति अब हो लेने दो
रस अधरों का पी लेने दो
पुनः मुझे तुम जी लेने दो
तुम ही रस हो रसिका तुम हो
शुद्धिकरण जप ‘सुचिता’ तुम हो
जन्मों का तप तुमको पाऊँ
कर्मों की अब संचिता तुम हो
जो है तुम्हारे योग द्वार
उससे बहते योन रास को
पी लेने दो उस काम रूप के
रस मे मुझे जी लेने दो
हो प्रसन्न अधरों को अब तो
एमवस्तु कह भी लेने दो
रस अधरों का पी लेने दो
पुनः मुझे तुम जी लेने दो
शिखा.. 



PLZ Subscribe RN TODAY NEWS CHANNEL https://www.youtube. com/channel/UC8AN- OqNY6A2VsZckF61m-g न्यूज़ या आर्टिकल व विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें (RN TODAY NEWS +919927141966) https://www. youtube.com/channel/ UCFS7PmVqRXSD_4CQXaYvx0A PLZ Subscribe
RN TODAY Online News Portal