
नजीबाबाद। अध्यापिका एवं लेखिका पायल अग्रवाल ने कहा कि इतिहास में आज का दिन हर भारतीय के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। रंग, रूप, वेष, भूषा से चाहे हम कितने भी अनेक हो, लेकिन जब तिरंगे के नीचे खड़े होते हैं तब हम सब एक हैं, भारतीय हैं। पायल अग्रवाल ने राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस की सभी देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए बताया कि भारत के संवैधानिक इतिहास में कई तारीखें महत्वपूर्ण हैं लेकिन इनमें से कुछ तारीखें ऐसी हैं जिनके ऊपर लोगों का ध्यान कम जाता है। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में राष्ट्रीय ध्वज की भी अपनी कहानी है और अपने दिन हैं। 22 जुलाई का दिन ऐसा ही एक ऐतिहासिक दिन जब देश का संविधान तैयार रही संविधान सभा ने देश के लिए राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया था। देश को आजादी मिलने से पहले 22 जुलाई 1947 को ही संविधान सभा ने इसी दिन देश के आधिकारिक ध्वज को अपनाने का फैसला किया था। उस समय भारत का अपना कोई आधिकारिक झंडा नहीं था। आजादी को मिलने में एक महीने से भी कम का समय था और आधिकारिक कार्यों में तब भी अंग्रेजों का ही झंडा इस्तेमाल हो रहा था। ऐसे में यह जरूरी हो गया था कि देश अपने आधिकारिक ध्वज का निर्धारण जल्दी करे और आजादी के लिए निर्धारित हो चुकी 15 अगस्त 1947 की तारीख से 23 दिन पहले ही ध्वज का चयन कर लिया गया था। राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) प्रत्येक भारतिय नागरिकों का गौरव है। यह हमारे राष्ट्र की संप्रभुता, स्वतंत्रता और राष्ट्र की अखंडता का प्रतिनिधित्व करता है। साथ ही साथ यह भी दर्शाता है कि भारत के लोग अपने मतभेदों के बावजूद, सामंजस्य और एकजुटता के साथ रहते हैं। यह दिन राष्ट्र में गौरव और राष्ट्रीय एकीकरण की भावना को पुनः स्थापित करने में बेहद ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इस तथ्य को देखते हुए कि भारत विविध धर्मों, संस्कृतियों और भाषाओं का देश माना जाता है। शौर्य, बलिदान, समृद्धि और शांति का प्रतीक हमारा तिरंगा प्रत्येक भारतवासी की पहचान है, जो देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा भी देता है।
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