
चांदपुर में कवि दिल की ओर से खूबसूरत महफिल ए मुशायरे का आयोजन
शायरो ने उम्दा कलाम पेश कर खूब दाद हासिल की
चांदपुर। कवि दिल की ओर से दारूत्तोहीद एंगलो अराबिक एकेडमी में एक खूबसूरत महफिल ए मुशायरे का आयोजन किया गया। जिस स्थानीय और बाहर से आये शायरो ने उम्दा कलाम पेश कर खूब दाद हासिल की। इस मौके पर कवि दिल की ओर से मुशायरे में मौजूद शायरो को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
बीती रात नगर के मौहल्ला शाह चंदन दारूत्तोहीद एंगलो अराबिक एकेडमी में अदबी संस्था कवि दिल की ओर से एक खूबसूरत महफिल ए मुशायरे का आयोजन किया गया।जिस स्थानीय और बाहर से आये शायरो ने उम्दा कलाम पेश कर खूब दाद हासिल की। इस मौके पर कवि दिल की ओर से मुशायरे में मौजूद शायरो को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
मुशायरे का आगा़ज़ अफजा़ल नजीबाबादी ने खूबसूरत नात ए रसूल ए पढ कर महफिल ए मुशायरे का बा बरकत आगा़ज़ किया।
गज़ल के दौर में अपना खूबसूरत कलाम पेश करते हुए शायर नवाब इरशाद चांदपुर ने कहा..उनसे मेरा सलाम कह देना, जी रहा है ग़ुलाम कह देना। शायर अयाज़ उल ऐजाज़ ने मौजूदा हालात पर तंज कसा…. सितमगर की सलामी कर रहे है,जो मालिक थे गुलामी कर रहे है। मुशायरे की सदारत कर रहे बुजुर्ग उस्ताद शायर आबिद अब्बासी ने कहा…. रुख से पर्दे को हटाता है हटाता भी नहीं,चाँद से चेहरा दिखाता है दिखाता भी नहीं। शायर आसिफ़ कमाल ने अपनी खूबसूरत शायरी से कमाल करते हुए कहा…. किताब-ए-इश्क़ का उन्वान एक मैं एक तू, किसी तरह से बदल और इस को हम कर दे। नजीबाबाद से आये शायर शादाब ज़फ़र शादाब ने एक के एक खूबसूरत कलाम पेश करते हुए कहा…. सवाली दर पे आये तो भिखारी मत समझ उस को, बुलंदी से उतरने में ज़रा से देर लगती है। मुशायरे की खूबसूरत निजामत कर रहे नाहीद सलीम चांदपुरी ने कहा…. दिलों के पार होना चाहता है.क़लम तलवार होना चाहता है।
मुशायरे को कामयाबी की तरफ बढाते हुए शायर गुलज़ार चाँदपुरी ने कलाम पेश करते हुए कहा…. सबसे आगे वो दफीने में दिखाई देंगे, आख़री कील जो ताबूत में जड़ जाते हैं। कवि दिल के बानी मशहूर शायर आसिफ़ मिर्ज़ा ने उम्दा कलाम पेश करते हुए कहा….मिलने उसे मैं शहर में आया तो था मगर,चौदह बरस में शहर का नक़्शा बदल गया। चांदपुर के मशहूर शायर शराफ़त चाँदपुरी ने किरदार का जिक्र करते हुए कहा… मेरे किरदार की क़ीमत लगा दी,किसी पे इतनी दौलत हो गयी क्या। शायर हक चांदपुरी ने खूबसूरत कलाम पेश करते हुए कहा… मैंने तो अपने गाँव के लहजे में बात की,जब के पढ़ा लिखा हूँ मैं जाहिल समझ लिया। अफ़ज़ाल नजीबाबादी ने कहा… जो ख़ुश्बू साथ अपने ला रहा है,वो झोंका तुझको छू कर आ रहा है। शायर हारिस नईम ने कहा….. गर यूँ हर कदम हयात का दुश्वार ना करते,ए काश हम ज़मीर को बेदार ना करते। अरशद एडवोकेट चांदपुरी ने बढिया कलाम पेश कर खूब दाद हासिल की उन्होने कहा…. तुम्हारी नफरतों की उम्र क्या है,
मुहोब्बत का सफ़र जारी रहेगा। डॉ मुबीन सहर चांदपुरी ने खूबसूरत मेजबानी के साथ ही उम्दा शायरी पेश की उन्होने कहा.. पलके बंद करते ही माज़ी में चला जाता हूँ,कैसे आँखों से मेरी हिज्र का मंज़र निकले। कार्यक्रम को सजाने में अहम किरदार निभाने वाले ज़िया चाँदपुरी ने बेहतरीन कलाम पेश करते हुए कहा….मुहोब्बत की कोई वैक्सीन ढूँढो. मरज़ नफ़रत का बढ़ता जा रहा है।
मुशायरा देर रात तक कामयाबी से चला मुशायरे में शहाबुद्दीन अंसारी,मौहम्मद यासीन,
साजिद अख्तर,शाहिद अंसारी,आफाक़ अहमद पत्रकार,नईम परवेज़ पत्रकार,अकरम , नवेद मेम्बर, ज़ाकिर अहमद आदि मौजूद रहे। मुशायरे को कामयाब बनाने मे डाक्टर मुबीन सहर, जिया चांदपुर, आबिद अब्बासी,नाहीद सलीम, अयाज़ उल ऐजाज़ का विशेष सहयोग रहा।
मुशायरे की सदारत आबिद अब्बासी ने की व निजामत नाहीद सलीम चांदपुरी ने की। मुशायरे में कलाम पढने वाले सभी शायरो को कवि दिल की ओर से प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
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