
बुलंद हौसलों ने मिनाक्षी को पहनाया सपनों का ताज
कहते हैं सपनों में पंख हो तो मंजिल की उडान आसान हो जाती है। कुछ ऐसी ही दिलचस्प कहानी है मिनाक्षी की। माता-पिता के संघर्ष से मिली प्रेरणा ने मिनाक्षी के अंदर ऐसा जज्बा भरा की एक छोटे से गांव से निकलकर आज वह बुलंदियों को छू रही हंै। तीन बेटियों व परिवार की देखभाल के साथ-साथ मिनाक्षी आज एक सफल उद्यमी हैं। यही नहीं 2025 मिसेज दिवा क्वीन बनकर उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं, जो शादी के बाद खुद के सपनों को मारकर चार दीवारी में कैद होकर रह जाती हैं।

पेश है रिहान अन्सारी की रिपोर्ट
दिल्ली एक छोटे से गांव टिकरी पोस्ट नरेला में जन्मी मिनाक्षी के पिता नरेश कुमार परिवार के गुजर-वसर के लिए दुकान चलाते थे, वहीं उनकी मां एक छोटा सा पार्लर चलाती हैं। अपनी व भाई की शिक्षा और अन्य सुख सुविधाओं के लिए किए गए माता पिता के संघर्ष से मिली प्रेरणा ने मिनाक्षी को अंदर से कुछ कर गुजरने जज्बा भर दिया। मिनाक्षी बचपन से ही पढ़ाई में तेज तर्रार रही। आठवीं तक की शिक्षा गांव से की। इसके बाद 9वीं की पढ़ाई के लिए पिता ने हरियाणा के गुरुकुल स्कूल में भेज दिया। यहां से मिनाक्षी ने 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद एमडीयू रोहतक यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन पूरा की। मंझिल की ओर तेज रफ्तार से बढ़ रही मिनाक्षी के सपनों को उस समय अल्पविराम लग जब ग्रेजुएशन के बाद उनकी शादी हो गई।
मिनाक्षी को लगने लगा कि शादी होने से उनके सारे सपने अधूरे रह जाएंगे। शुरुआत में हुआ भी कुछ ऐसे ही। ससळ्राल की जिम्मेदारियों के बीच खुद के लिए समय निकाल पाना मुश्किल लग रहा था। काफी कोशिश करने के बाद जैसे-तैसे डिस्टेंस से एमबीए की पढ़ाई पूरी की। इसी बीच मिनाक्षी की प्रेगनेंसी भी चल रही थी। जिसके चलते कई दिक्कतें सामने आई, लेकिन मिनाक्षी ने हिम्मत नहीं हारी और अपना एमबीए पूरा किया। इसके बाद भी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही थी। उस समय के ज्यादातर लोगों घर की महिलाओं का नौकरी या कोई अन्य बाहरी काम करना पसंद नहीं था। यही मिनाक्षी के साथ भी हुआ। उन्हें लगने लगा कि अब सिर्फ घर संभालना है और हाउसवाइफ बन कर रहना है।

मिनाक्षी कुछ समय मायके आई तो वहां मां के साथ ब्यूटी पार्लर का काम सीखा। इसके बाद जब मिनाक्षी की पहली बेटी स्कूल जाने लगी तो गांव में ही एक छोटा सा पार्लर शुरू कर दिया। सात साल तक वहीं काम किया। इस दौर में उनकी दो और बेटियां हुई। मिनाक्षी बताती हैं कि तीन बेटियों मेरी कमजोरी नहीं,बल्कि मेरी ताकत बनी। बेटियों ने ही अहसास दिलाया कि मुझे सिर्फ माँ नहीं मिसाल बनना होगा। बच्चों के सपनों के लिए मुझे पहले अपने सपने जितने होंगे, उनके मन सवाल उठने लगे कि क्या सोच के साथ मैंने गांव छोड़ा और शहर में एक नया सैलून शुरू किया। इसके बाद मिनाक्षी ने आगे बढ़ने का ठाना तो पिछे मुड़कर नहीं देखा। मिनाक्षी ने एक अकादमी शुरू की जहां जरुरतमंद लड़कियों को बिना किसी फीस के ट्रेनिंग देती हैं।
मिनाक्षी का मानना है कि हर महिला को अपने पैरों पर खड़ा होने का हक है और अगर मैं किसी की मदद कर सकूं, तो वही मेरी जीत है। सैलून अच्छा चलने लगा, लोग मेरे काम से खुश होने लगे लेकिन मुझे लगता है कि मेरी उड़ान अभी अधूरी है। मैं चाहती थी कि मेरी बेटियां मुझे सिर्फ मां के रूप में नहीं बल्कि एक प्रेरणा के रूप में देखें। मिनाक्षी के अन्दर जब उनके पति ने टैलेंट देखा तो कहा अपने सपनो को पूरा करो अपने दम पर सफलता के शिखर को पार करो इसके बाद मिनाक्षी ने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा और ऐसा जलवा बिखेरा कि पहले ही इवेंट में उन्होंने मिसेज दिवा क्वीन 2025 का टाइटल हासिल कर लिया। मिनाक्षी बताती हैं यह क्राउन मेरे लिए सिर्फ एक टाइटल नहीं यह मेंरे सपनों का क्राउन है और मेरी पूरी जर्नी का सम्मान था।

मिनाक्षी आज एक सफल उद्यमी हैं। वह अस्तित्व कंपनी के साथ जुड़कर महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए काम कर रही हैं। वह आज एक मां होने के साथ-साथ उन महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल हैं जो पारिवारिक बंदिशों में अपने सपनों को जीना भूल चुकी हैं। मीनाक्षी बताती हैं कि मैं सिर्फ अपनी बेटियों के लिए नहीं, हर घर में छुपी हुई एक छोटी मिनाक्षी के लिए जीत रही हूं।

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