
कुछ गहरा सा लिखना था,
प्रेम से ज्यादा क्या लिखूँ..?
कुछ ठहरा सा लिखना था,
दर्द से ज्यादा क्या लिखूँ..?
कुछ समन्दर सा लिखना था,
आँसू से ज्यादा क्या लिखूँ..?
कुछ अपना सा लिखना
आँखो से ज्यादा क्या लिखूँ..?
कुछ खुशबू सा लिखना था,
किरदार से ज्यादा क्या लिखूँ..?
अब जीवन सा प्यारा लिखना था
तुमसे ज्यादा क्या लिखूँ..?
शालू राठी – देहरादून (मेम्बर आर एन टुडे)
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