
जब वो देकर उल्फत की खैरात चले
हम भी लेकर अश्कों की बारात चले
दुनियाँभर के सब दर्दों से काम रहा
साथ हमारे बस मुशकिल हालात चले
जाओ तुमको हांसिल हों सारी खुशियाँ
दिल वाले जाँ की देकर सौगात चले
आप हमारे आँसू पोछें ठीक नहीं
हम ही बे मौसम लेकर बरसात चले
याद कभी आये तो वापस मत आना
आज दफ़न कर सारे ज़ज्बात चले
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आधार आपका अधिकार है भूलिए मत – शालू राठी
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